आत्मनिर्भरता पर निबंध । महत्व । Essay on Self Reliance in Hindi

दोस्तों आप सभी को पता ही है की जीवन एक संघर्ष है और इस संघर्ष भरी जिन्दगी में जीवन जीने के लिए आत्मनिर्भरता का होना बहुत ही आवश्यक हो गया है इस समय । संघर्ष भरे जीवन में एक व्यक्ति को उसको समाज द्वारा अपेक्षित सहयोग भी मिलता रहता है ।

परन्तु इस सहयोग से हमें दुसरे पर निर्भर रहने का आदत सी लग जाती है, जो बाद में चलकर हम अपने बल पर कुछ करने के लायक नही रह जाते है । हम दुसरे पर निर्भर रहकर वास्तविक सुखशांति का लाभ नही उठा सकते है । इसलिए सही कहा गया है “पराधीन सपनेहु सुख नाहीं“।

हमें अपने वास्तविक जीवन में स्वालंबन या आत्मनिर्भर बनना है तो हमें दुसरे से चाह की इच्छा छोड़ देना चाहिए । और खुद पर निर्भर होकर कुछ अलग करने को सोचना चाहिए तभी हम एक आत्मनिर्भर नागरिक कहला सकेंगे ।

आत्मनिर्भर का अर्थ

आत्मनिर्भर का अर्थ है की एक विशेष व्यक्ति किसी दुसरे पर निर्भर न रहकर स्वयं ही सारा काम कर ले उसे हमें आत्मनिर्भरता कहते है । एक आत्मनिर्भर व्यक्ति अपने घर परिवार की सारे सुख सुविधाओ के साथ खर्च अच्छे से संभाल लेता है, ये भी एक आत्मनिर्भर का उदाहरण है ।

दुसरे भाषा में कहे तो, हम किसी दुसरे पर आश्रित न होकर खुद का ऐसा काम करे जिससे हमारा जीवन अच्छे से जीवनयापन ही सके ।

हम छोटे या बड़े पशु पक्षियों को देखे तो हमें मालूम होगा की वो सभी कितना आत्मनिर्भर है उन्हें अपने भोजन के लिए किसी दुसरे के सहारे का इंतजार नही होता है, बल्कि वो खुद चलकर खुद के प्रयत्न से अपने भोजन को हासिल करते है ।

आत्मनिर्भरता का महत्व

आत्मनिर्भरता का बहुत ही महत्व है आज के इस स्वार्थी दुनिया में । अगर हम एक जिम्मेदार नागरिक है तो हम आत्मनिर्भर हो सकते है और हमें आत्मनिर्भर होना भी चाहिए । जैसे ही मनुष्य पृथ्वी पर जन्म लेता है तो वो जन्म लेने बाद वो अपने माँ बाप पर निर्भर रहता है और जैसे युवावस्था होता है तो उसको परिवार व समाज का सहयोग लेना पड़ता है ।

लेकिन हमें स्कूल के समय से ये सिखाया जाता है की स्वालंबी व आत्मनिर्भर बनो अपना काम खुद करो दुसरे के भरोसे मत बैठो । अगर हम आत्मनिर्भर हो जाते है तो दुसरे के नजरो में हमारी अहमियत बढ़ जाती है फिर समाज के भी कई लोग आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करते है ऐसे करने से हमारे देश आत्मनिर्भर बनने से कोई नही रोक सकता है ।

आत्मनिर्भर न होने पर नुकसान

  • अगर आप आत्मनिर्भर नही है तो आप हमेशा से दुसरे के लिए उपहास का पात्र बन सकते है ।
  • अगर आप हमेशा से अपने काम को लेकर दुसरे पर निर्भर है तो निश्चित ही आपका नुकसान होगा जब तक आप आत्मनिर्भर नही होंगे ।
  • आप अपने काम को लेकर दुसरे पर आश्रित है तो आपके काम में देरी लग सकती है ।
  • आप अपने रिश्तेदार आपके रिश्ते का फायदा उठा सकते है क्योकि दुसरे से काम कराने के चक्कर में आपसे नफरत व घृणा कर सकते है ।
  • हमें दुसरो पर ज्यादा निर्भर रहने की वजह से हम कोई भी काम अच्छे से समझ व सीख नही सकते ।
  • हमेशा हमें दुसरो पर आश्रित होकर कम करवाने से खुद को असहज महसूस करते है ।
  • अगर आप अपना काम खुद नही करते है और दुसरे से करवाते है हमेशा तो आप अपने शरीर आलस की ओर अग्रसित करते है ।
  • अगर हम खाली बैठे रहते है तो हमें मानसिक बीमारियाँ से ग्रसित हो सकते है ।
  • यदि हम आत्मनिर्भर नही है तो समाज में हमारे प्रति सम्मान नही रहता है ।

निष्कर्ष

अगर हम एक आत्मनिर्भर व्यक्ति बनते है तो हमारे स्वास्थ के लिए भी बहुत ही अच्छा महसूस होता है । ए आत्मनिर्भर की परिभाषा किसी स्कूल या विद्वानों के द्वारा नही प्राप्त की जा सकती है ।

इसके लिए हमें खुद को बदलना पड़ेगा, खुद को आत्मनिर्भर बनाना पड़ेगा अपने काम स्वयं ही करने की आदत डालनी पड़ेगी ।

जिस तरह से आत्मनिर्भर एक स्वस्थ मनुष्य के लिए अच्छा है ठीक उसी प्रकार देश के हित के लिए भी उतना ही लाभदायक है । क्योकि ए कोई नही चाहता की हमारा देश जरुरत की चीजो की पूर्ति के लिए दुसरे देश पर निर्भर रहे ।

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