तम्बाकू पर निबंध । हानिकारक प्रभाव । प्रतिबंध । नियंत्रण (Essay On Tobacco)

अगर आजकल की दुनियाँ में देखा जाये तो लोगों को ख़राब चीजो की लत लगी हुई है । जैसे तम्बाकू और सिगरेट के नशे के आदी हो गए है लोग । ये उनके सेहत के लिए बहुत खतरनाक है धीरे – धीरे उनके शरीर को नष्ट कर देता है । इससे होने वाले घातक बीमारी कैंसर की ज्यादे मात्रा में देखा जा रहा है ।

तम्बाकू का नशा देखा जाये तो ये पूरी दुनिया पर छाया हुआ है । इसका असर पर्यावरण के प्रतिकूल पर असर करता है । तम्बाकू के खेती करने की वजह से हर साल लगभग 5,00,000 एकड़ जमीन नष्ट हो जाती है । या कह ले की वह जमीन बंजर हो जाती है । उस जमीन पर किसी और चीज का उपज नही कर सकते है ।

सरकार को चाहिए की इस सब को पूरी तरह से बंद कर दे और आसपास के तम्बाकू वाले चीजो को नष्ट कर दे । तम्बाकू की वजह से हमारे सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है । इसका असर बच्चो पर भी देखने को मिल रहा है । धुम्रपान करने वाले लोग अपने आस – पास के लोगों को भी संक्रमित कर करते रहते है ।

धुम्रपान को बंद करना एक चुनौती है सबके सामने क्योकि लोगों को इसकी लत लग चुकी है । कई जगह इस खतरनाक नशीली पदार्थ को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, फिर भी लोग इस चीज का चोरी छुपे तम्बाकू का सेवन करना चाहिए ।

इस धुम्रपान करने की वजह से पर्यावरण भी प्रदूषित होता रहता है । बीड़ी, सिगरेट से निकलने वाली धुआं एक स्वस्थ मनुष्य के फेफड़ो में जाकर कैंसर जैसे बीमारी पैदा करता है । जब भी व्यक्ति इस जहरीली वातावरण साँस लेता है तो वो सिगरेट के धुएं से निकलने वाली निकोटिन हमारी शरीर की तंत्रिका को हानि पहुँचता है ।

तम्बाकू के प्रकार

वैसे तम्बाकू के कई प्रकार के होते है, जैसे सिगरेट, सिगार, सिगारिलोस, घुलनशील उत्पाद, इलेक्ट्रानिक सिगरेट, पारम्परिक धुम्रपान करने वाले तम्बाकू उत्पाद ।

तम्बाकू का तंत्र

इस तम्बाकू में निकोटिन पाया जाता है । वह एक नाइट्रोजन से बना अमीन यौगिक होता है । इसका रासायनिक सूत्र C10H14N2 है । निकोटीन के वजह से शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा होने लगती है । निकोटीन के वजह से ब्लडप्रेशर, रक्त नालियों में संचार धीमा, त्वचा सुन्न पड़ने लगती है इसके साथ ही दमा खाँसी, श्वास फूलना इत्यादि तरह के बीमारी होता है ।

इस निकोटीन को पेशाब के जरिये मापा जाता है । हालाँकि लार और पेशाब में कोटिनिन के जमाव की संख्या को भरोसमंद नही माना जाता है, परन्तु इसको एकत्रित करना आसान होता है पर ये महंगा साबित होता है । पर ये व्यक्ति में कोटिनिन की मात्रा उसके फ़िल्टर, गहराई तक लेना, लम्बाई और सेक्स पर निर्भर करता है ।

मनुष्य शरीर में मौजूद निकोटीन एक रिसेप्टर की तरह काम करता है । इसका मुख्य तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क में मौजूद होता है जो वहाँ से चारो ओर अलग – अलग 5 इकाईयों में यह काम करता है । ये निकोटीन के तंत्रिका तंत्र शरीर के विभिन्न भागो में कई तरह की प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है ।

अगर जैसे निकोटीन की मात्रा कम पड़ती है वैसे ही तंत्रिका तंत्र की प्रणाली दिमाग में उपस्थित मुख्य तंत्रिका तंत्र को उतेजित करने लगता है । जिसके परिणामस्वरूप मनुष्य को दिल का दौरा पड़ सकता है ।

निकोटीन का प्रभाव

जो भी तम्बाकू या सिगरेट का सेवन करते है वो कोई भी दहनशील पदार्थ ले सकते है जिनमे 7000 से ज्यादा रासायनिक हो । तम्बाकू की स्वाद बढ़ाने के लिए निकोटीन के अवशोषण की मात्रा बढ़ाने के लिए करीब 100 तरह के घटक मिलाया जाता है ।

सिगरेट को देखा जाये तो बहुत ही कुशलता और उच्च इंजीनियर की दवा-वितरण प्रणाली होती है । जो तम्बाकू के धुएं को साँस लेने से स्वस्थ मनुष्य के शरीर में धुम्रपान करने वाले के प्रति सिगरेट का 1 – 2 मिलीग्राम निकोटिन की मात्रा में लेता है ।

तम्बाकू पर क्यों प्रतिबंध लगाने की जरुरत है ?

तम्बाकू को देखा जाये तो कई कारण है प्रतिबंध लगाने के लिए जो निचे दिए गये है –

स्वास्थ के लिए हानिकारक

जैसा की सब जानते है तम्बाकू स्वास्थ के लिए कितना हानिकारक है, तो भी लोग उसको शौक से इसका सेवन करते है । तम्बाकू के धुएं में बहुत सारे रासायनिक हानिकारक पदार्थ होते है जो हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक होते है । और जो चबाने वाले तम्बाकू यानि की गुटका जिसमे 28 सिद्ध कर्सिनोजेन की मात्रा पायी जाती है ।

दुनियाभर में देखा जाये कैंसर के ज्यादातर मरीज इसके ही कारण होता है । जिनमे 60% मामले केवल पुरुषो होते है और 25% महिलाओ में होते है जो तम्बाकू का सेवन करते है । इसी कारण तम्बाकू पर प्रतिबंध लगाने की जरुरत है ।

वित्तीय लागत का नुकसान

अगर देखा जाये तो तम्बाकू से हो रही मौतों और धुएं के कारण हो रही बीमारियों पर बहुत ही अधिक उत्पादकता का होता है । कहा जाता है की प्रति वर्ष 156 बिलियन से अधिक लागत का इन सभी कारणों से नुकसान पहुँचता है । और साथ ही में 170 बिलियन डॉलर धुम्रपान के कारण बीमार हुए लोगों पर चिकित्सा पर खर्च हो जाता है ।

रिपोर्ट ने ये दावा किया जाता है की आज के समय में 1 बिलियन लोगो की मौत का कारण तम्बाकू को माना जाता है । सिर, फेफड़े, मुख और गर्दन में कैंसर के जो विकासशील देश उनमे ये आम बात है । उनके यहाँ पर 80% मामलो में तम्बाकू का कारण माना जाता है ।

तम्बाकू की लत को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है ?

तम्बाकू को छोड़ने के लिए लोग आज न जाने क्या – क्या नही करते है, परन्तु उनकी लत लग जाने के बाद छोड़ने नाम ही नही लेती है । दुनियाँ की बात करे तो पहले 6 मिलियन से ज्यादे लोग इस तम्बाकू के सेवन से मर रहे थे । तम्बाकू की सेवन से हमारे शरीर के अंदर कई सारे अंगो को नुकसान पहुँचता है और ये घातक बीमारी का रूप धारण कर लेता है और अंततः उनकी मृत्यु हो जाती है ।

आज के समय की बात करे तो लोगों की आयु धुम्रपान करने की वजह से 10 – 15 साल कम हो जा रहे है । अगर लोगो को अपनी लत छोडनी है तो वो खुद से प्रतिज्ञा लेकर या किसी अच्छे डॉक्टर से मिलकर धीरे – धीरे छोड़ने की कोशिश करनी चाहिए । प्रत्यक्ष रूप से छोड़ने पर लोगो की कई तरह की कमियों महसूस होने लग सकता है और उनके लिए ये घातक साबित हो सकता है ।

निष्कर्ष 

इस तम्बाकू की वजह से फ़ैल रहे गंभीर बीमारी के कारण तुरन्त प्रतिबंधित कर देना चाहिए । जिससे धुम्रपान करने वाले की जीवन और उनके परिवार का भविष्य सुरक्षित रहे ।

सरकार को इस पर अलग – अलग तरीके से समाधान निकालना चाहिए । तम्बाकू पर प्रतिबंध लगाना एक बहुत ही जटिल समस्या है । क्योकि तम्बाकू का सेवन करना बिना मौत का बुलावा देना है ।

हमें भी इन सभी समस्याओं से बचना चाहिए क्योकि धुम्रपान करना एक बुरी आदत की तरह है । इसकी लत को कभी नही लगाना चाहिए ।

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