जल संरक्षण पर निबंध । Essay on Water Conservation in Hindi

“जल ही जीवन है” यह कहावत सिर्फ शब्द ही नहीं बल्कि इसका अर्थ है कि जल जीवन का वह अमूल्य अंग है जिसके बग़ैर कोई जीवन की कल्पना भी नही कर सकता।

इस धरती के सभी जीवों के लिए जल एक कीमती धरोहर है।  जिस धरती पर हम रहते हैं वहां सिर्फ 1% पानी ही उपयोगी मानी गयी है। इसके अलावा तेजी से बढ़ रहे जन संख्या और आधुनिकरण की वजह से विश्व के सभी देशों में जल से होने वाली विपदा आटी रहती है।

आज के समय में हमारे सुनहरे कल के लिए जल संरक्षण को महत्वपूर्ण मानते हुए इसके बारे में जागरूकता फैलाने का प्रयत्न करना चाहिए।

जल का महत्व

हमारे जीवन का हर कार्य जल पर ही आधारित है इसलिए जल सबके रोजमर्रा के काम को सफल बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे कई कार् होते हैं जो जल के अभाव में अधूरे रह जाते हैं। जल की महत्व को जानते हुए भी लोग इसे बिना कोई इस्तेमाल किये व्यर्थ करने में लगे रहते हैं।

जल की संरक्षण के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लिए हमें सबसे प्रथम कार्य बारिश के पानी को इकट्ठा करना होगा। रोजमर्रा के कार्यों में जल के उपयोग में कमी करना होगा। विज्ञान के द्वारा सागर के नमक वाले पानी को मीठे पानी में परिवर्तित करके ही उसका उपयोग करना होगा। जितना हो सके उतना पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित करना होगा।

जल का अभाव से परेशानी

एक आंकड़े के मुताबिक इस दुनिया में कई देश ऐसे हैं जो सूखे से जूझ रहे हैं कहने का तातपर्य, जहाँ बारिश की एक बून्द तक नही पहुंचती अथवा जहाँ नदियों का स्तर बहुत कम है। इस तरह के  स्थान जल के अभाव में रहते हैं।

इस तरह के स्थानों पर वहां रह रहे निवासियों को को कोसों दूर जाकर अपने लिए जल की व्यवस्था करनी पड़ती है। कई जगहों पर प्रकृति के इस बेशमकिमती भेंट को खरीद कर इस्तेमाल करते हैं। जल के अभाव के कारण लोग कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होकर ही मर जाते हैं।

जल सरंक्षण की कोशिश

जल की यह समस्या विश्वव्यापी समस्या बन गया है इसी कारण पूरी दुनिया के लोगों को एकसाथ सामने आकर इसमें सहयोग देना होगा इसलिए इस अमूल्य वरदान को बचाने का प्रत्यन कर सकते हैं।

इस उद्देश्य के लिए हमें कोशिश अपने घर से ही करनी चहिये। हमें अपने घर पानी की एक-एक बूंद को महत्व देते हुए इसे बचाने का प्रत्यन करना चाहिए अर्थात इसे बहते हुए नही छोड़ना चाहिए।

लोग ऐसा करते है कि वे अपने शौक के स्नान के समय नल का इस्तमाल करने के बजाए सीधे फव्वारे का इस्तेमाल करते हैं जो कि जल की कमी को और बढ़ावा देता है। हमें हमारे घर के बागबान में पानी देते समय पाईप को छोड़कर फव्वारे का इस्तेमाल करना चाहिए।

निष्कर्ष

हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगायें जिससे वर्षा का अभाव न हो। यदि मुमकीन हो तो पेड़ बरसात के मौसम में ही लगाएं जिससे पौधे को प्रकृति द्वारा पानी मिल जाये। अपना कर्तव्य समझते हुए हमें ऐसे पौधों को रोपने का प्रत्यन करना चाहिये जो कम पानी में भी रह सकते हैं।

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