सत्यमेव जयते पर निबंध । Essay on Satyamev Jayate in Hindi

सत्यमेव का अर्थ सत्य पर आधारित है, सत्यमेव जयते का मतलब होता है की “सत्य की हमेशा से जीत होती है” । ये शब्द हमारे भारत देश में राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तम्भ के चक्र के नीचे लिखे जाने की वजह से जाना जाता है । सत्यमेव जयते को देवनागरी लिपि भाषा में लिखा गया है ।

ये भारत देश के करेंसी रुपया पर भी लिखा हुआ मिलता है इसका मतलब ये है की लोग हमेशा सत्य की राह पर चले । हमारे देश राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी हमेशा कहा करते थे की सत्य की राह पर चलो इसके लिए उन्होंने सत्याग्रह आन्दोलन भी चलाया था ।

इसका अर्थ ये होता है की जो भी व्यक्ति सत्य की राह पर चलता है, उसको हमेशा कामयाबी और ख़ुशी मिलती है । मगर इस सत्य की राह पर चलने में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, परन्तु अपना हिम्मत नही हारना है ।

इस सत्यमेव जयते को हमारे राष्ट्र के पटल पर लाने के लिए माननीय मदनमोहन मालवीय जी के कठिन परिश्रम के द्वारा ही इसका प्रचार व प्रसार हो सका ।

मालवीय जी द्वारा इस प्रचार अभियान का एक ही मकसद था की सभी लोगो को सत्य के मार्ग पर लाना, क्योंकि उनको पता था हमारे देश के विकास सत्य के मार्ग पर चल कर ही हो सकता है ।

वो सभी युवाओं को सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते थे क्योंकि कहा जाता है हमारे देश का भविष्य देश के युवा के हाथ में है और जो युवा सत्य की मार्ग चलेगा वो ही अपनी और देश तक़दीर बदलेगा।

सत्यमेव जयते का इतिहास

सत्यमेव जयते भारत का एक राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है ।  ऐसा कहा जाता है की 250 ईसा पूर्व में सम्राट अशोक जी द्वारा उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निकट सार नाथ में एक श्लोक देवनागरी लिपि लिखा था, जिसकी शुरुवात सत्यमेव जयते शब्द में हुआ । जिसका मुख्य उद्देश्य  ही था की सत्य ही  हमेशा जीतता है।

ये हमारे भारत देश  के संविधान और राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तम्भ को दर्शाया गया है । इसकी मान्यता भारत सरकार द्वारा अशोक स्तम्भ पर लिखा सत्यमेव जयते को 26 जनवरी 1950 को पूर्णरूप से लागू हो गया ।

तब से सभी सरकारी दफ्तर, कोर्ट, कचहरी या संसद भवन हो सभी जगह सत्यमेव जयते की लिखा रहता है, ताकि लोग सत्य की राह पर चले कोई भ्रष्टाचार या असत्य कार्य ना करें ।

भारत देश इतिहास रहा है की हमें लम्बे समय तक संघर्ष व अनगिनत बलिदान के बाद जाकर हमें सफलता मिली है ।

सत्य की शक्ति

सत्य में इतना शक्ति है की अगर हम ये ठान ले की मुझे ये काम या मंजिल को पूरा करना ही है तो शत प्रति शत वो काम पूरा हो जायेगा । भले ही रास्ते में कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़े, पर वो काम पूरा हो ही जायेगा ।

इसी सभी चीजो के अनुसार भारत के करेंसी रुपया पर भी इस सम्राट अशोक के स्तम्भ को दर्शाया गया है। ताकि लोग बुराई का साथ छोड़ कर अच्छाई की राह पर चले मतलब असत्य की पर हमेशा सत्य की ही जीत होती है ।

इसका संस्कृति में एक श्लोक है जो इस प्रकार है –

सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः
येनाक्रमंत्यृषयो दूत कामा यत्र सत्यस्य परमं निधानभ।

इसका अर्थ होता है  की, सत्य की हमेशा से जय होती है ना की असत्य की, एक यही मार्ग है जिस पर आप चलकर अपनी कामनाये पूर्ण कर सकते है । ऋषीगण जीवन के चरम लक्ष्य को प्राप्त करते हैं।

सत्य की जीत  

सत्य एक ऐसी चीज है जो सत्य मात्र से मनुष्य के मन सुख और शांति का अनुभव होता है । जो भी व्यक्ति हमेशा सत्य बोलता है उसके अंदर किसी चीज का भय नहीं रहता है ।

उसका दिल व दिमाग हमेशा शान्त और साफ रहता है । उसकी समाज में हमेशा प्रशंसा होती रहती है । और जो सत्य के मार्ग पर चलता है सफलता निश्चित ही मिलती है ।

सत्यवादी लोग हमेशा अपना सिर उठाकर चलता है उसके अंदर लोगों का विश्वास दिखता है । उसको जो भी काम मिलता है उसको बड़ी ईमानदारी व निष्ठा से करता है ।

वो किसको झूठा दिलासा नहीं दिलाता है । इसके लिए उस पर लोग भरोसा करते है । एक तरह से सत्य की राह पर चलने वाला हमेशा से भरोसे के लायक होता है ।

असत्य की हार

असत्य की मार्ग पर अब तक जो चला है उसको हमेशा से मुंह की खानी पड़ी है । क्योंकि कहा जाता है जो भी व्यक्ति असत्य की मार्ग पर चलता है उसको कभी सफलता नहीं मिलती है ।

असत्यवादी लोग अगर वो किसी भी चीज में सफलता मिलती है पर वो ज्यादा देर तक नहीं रहती है । आखिर में उसके झूठ का पर्दाफाश हो ही जाता है ।

ये असत्यवादी व्यक्ति हमेशा से उसका स्वभाव लोगों से झूठ बोलना, निंदा करना, फरेब करना, धोखा देना ये ही सब उसके मुख्य काम रहते है,और ज्यादातर भले लोग उसके चंगुल फंस जाते है और आसानी से उसका शिकार हो जाते है । ऐसे लोग इंसान व समाज के नजरों में गिर जाते है ।

निष्कर्ष

लोगों को हमेशा सत्य की राह और चलना चाहिए, क्योंकि सत्य बोले वाला व्यक्ति वीर, साहसी, सदाचारी, ईमानदार व परिश्रमी होता है ।

लोग को सदैव अपने जीवन में सत्य की राह को अपनाना चाहिए क्योंकि इससे उसके प्रगति की रास्ते खुले रहते है ।

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